दर्द का दरमां करो इस तरह चारागारों, आदमी बीमार हो कौम न बीमार हो

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कानपुर की सरजमीं से चलकर औरंगाबाद आयी उर्दू अदब की मशहूर शायरा तरन्नुम कानपुरी के सम्मान में शहर के शायरों ने एक मुशायरा का आयोजन किया.मुशायरे की सदारत शहर के अजीम एवं नामचीन शायर शब्बीर हसन शब्बीर ने तथा संचालन युवा संचालक युसूफ जमील ने किया.मुशायरे का आगाज अबू तालिब रजा के द्वारा प्रस्तुत की गयी नात ए पाक से हुआ और उसके बाद शायरों ने जो महफ़िल जमाई वह देर रात तक चली.मुशायरे के आगाज से पूर्व शायरा तरन्नुम कानपुरी को कमिटी की तरफ से शाल देकर सम्मानित किया गया.इस सम्मान को पाकर उन्होंने कमिटी का शुक्रिया अदा किया.शायरा तरन्नुम कानपुरी को मंच पर बुलाने से पहले मंच संचालक युसूफ जमील ने कुछ इस अंदाज में इस्तेकबाल करते हुए आमंत्रित किया और कहा कि ” कौन सा काम है जो कि इसने नहीं करवाया है,भूख ने फूल की बच्ची को भी रस्सी पर चलवाया है ” ने महफ़िल को रौनक प्रदान कर दिया.

शायरा ने जब मंच से मौजूदा परिस्थितियों एवं इंसानी फितरतों से सम्बन्धित शेर ”दर्द का दरमां करो इस तरह चारागारों, आदमी बीमार हो कौम न बीमार हो” सुनाया तो पूरी महफ़िल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठी,उन्होंने अपने इस शेर की अगली पंक्ति “खैर है क्या शर्म क्या उसको नही कुछ पता,तुमसे कहता क्यों हुई तुम तो समझदार हो को जैसे ही पूरा किया श्रोता वाह वाह कर उठे.उन्होंने अगला शेर “दिल पे बेइंतहा जख्म खाए हुए,ए कहो क्यों हो गम को छुपाये हुए,हाय क्या दौर है लोग मिलते हैं आज,आस्तीनों में खंजर छुपाये हुए को लोगों ने काफी पसंद किया.इसके अलावे मुशायरे में आये गुलफाम सिद्दीकी, इकबाल अख्तर दिल, आफताब राणा,डॉ इबरार सावन, कलीम राहत, निजाम कुरैशी, शिबली फिरदौस ने अपनी रचनाओं एवं प्रस्तुतियों से लोगों का दिल जीत लिया.इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में उप निर्वाचन पदाधिकारी मो जावेद इकबाल मौजूद रहे.इसके अलावे मो दायम सहित सैकड़ों की संख्या में शहर के शेर ओ शायरी के शौक़ीन एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

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