निजी विद्यालयों के द्वारा फी बढ़ोतरी एवं डेवलपमेंट चार्ज के नाम पर हो रहे शोषण के खिलाफ हुंकार भरेंगे अभिभावक

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निजी विद्यालयों के द्वारा डेवलपमेन्ट शुल्क, वाहन शुल्क एवं कई हिडेन शुल्क के नाम पर वर्षों से आर्थिक एवं मानसिक रूप से शोषण का शिकार हो रहे अभिभावकों के सब्र का बांध टूटता दिख रहा है।विद्यालयों के शोषण से परेशान हो अभिभावकों ने ‘छात्र अभिभावक’ के बैनर तले एकत्रित हो आज एक बैठक की।शहर के आईएमए हॉल में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता दीपक कुमार सिन्हा ने की। निजी विद्यालयों के शोषण से परेशान अभिभावकों ने बैठक के माध्यम से लोगों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। अभिभावकों का कहना था कि जिले के अधिकांश विद्यालय सीबीएसई द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नही कर रहे है जिसको लेकर न सिर्फ छात्र परेशान है बल्कि विद्यालयों के द्वारा की जा रही अवैद्ध वसूली से वे मानसिक और आर्थिक पीड़ा झेल रहे हैं।कहा कि निजी विद्यालयों में शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार हो या न हो लेकिन फीस में बढ़ोतरी होना निश्चित है। इन विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के बजाय इनकी नजर अभिभावकों के जेब पर रहती है। अधिकतर विद्यालयों में प्रतिवर्ष पाठयक्रम में तब्दीली कर विभिन्न पब्लिकेशन से मोटी रकम लेकर किताबें बदल जाती है।

अभिभावकों ने कहा कि एक तरफ सरकार बाल श्रम को लेकर व्यापक कार्यक्रम चलाई जा रही है वही इन निजी विद्यालयों के द्वारा जबरन किताबों की संख्या में वृद्धि कर बच्चों के बस्ते का बोझ बढ़ा दिया जाता है और बच्चे घर पहुँच कर पूरी तरफ से थक जाते है। क्या यह शारीरिक शोषण के अंतर्गत नहीं आता है। अभिभावकों ने बताया कि पिछले वर्ष ही सीबीएसई बोर्ड द्वारा निजी विद्यालयों के लिए दिशा निर्देश जारी किये गए थे और उस निर्देश के अनुसार कोई भी स्कूल छात्रों से घोषित फीस के अलावा किसी अन्य नाम से कोई फीस नहीं वसूलेंगे।  साथ ही स्कूलों को पहले ही अन्य फीस की जानकारी देनी होगी. साथ ही अपनी भूमिका शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी तक सीमित करते हुए आधारभूत ढांचे के ऑडिट की जिम्मेदारी राज्यों पर छोड़ दी है।  अभिभावक की दिक्कतों व शिकायतों को दूर करने के लिए सीबीएसई ने एफिलीएशन के नए बायलॉज तैयार किए गए हैं।  इस नए नियम के तहत स्कूल यूनिफार्म और किताबें निर्धारित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। स्कूल यदि इन नियमों का उल्लंघन करते हैं तो सीबीएसई उनकी मान्यता रद्द कर देगा। निजी विद्यालयों को स्कूलों की फीस में भी पूरी पारदर्शिता लानी होगी। इसके तहत स्कूल वेबसाइट और फॉर्म पर जो फीस बताई गई है उतनी ही फीस अभिभावकों को देनी होगी।

स्कूल अब किसी भी तरीके का हिडन चार्ज यानि छुपा हुआ चार्ज अभिभावकों से नहीं वसूल पाएंगे।इतना ही नहीं सीबीएसई ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत जिस पिता की एक संतान यदि लड़की है तो उसे निशुल्क और दूसरी संतान भी लड़की है तो उसका हाफ फी लेने की घोषणा पिछले वर्ष की थी। लेकिन आज तक उस आदेश का अनुपालन किसी ने नहीं किया। बच्चे की सुरक्षा को लेकर भी विद्यालय लापरवाह नजर आते हैं। भेड़ बकरियों की तरह विद्यालय वाहन में बच्चे ठूंस ठूंसकर भेजे जाते हैं। वाहनों के रख रखाव भी मानक के अनुकूल नहीं है। बच्चों के शैक्षणिक विकास को लेकर कई तरह के शुल्क लिए जाते हैं परन्तु उसके बावजूद भी बच्चो को प्राइवेट ट्यूशन का सहारा लेना पड़ता है। अभिभावकों ने बैठक के माध्यम से चरणबद्ध आंदोलन करने का संकल्प लिया और सीबीएसई के द्वारा निर्धारित नियमों की एक प्रति जिला प्रशसान एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौपने की बातों पर जोर दिया गया ताकि जिला प्रशासन उसपर कार्रवाई कर सके। । 

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